करवा चौथ 2026: 29 अक्टूबर की तारीख और शहरवार पूजा मुहूर्त

15 अक्टूबर 2026 · लेखक Bhagya Bidata · Read in English

करवा चौथ क्या है

करवा चौथ उत्तर भारत का एक जाना-माना व्रत-पर्व है। इस दिन विवाहित स्त्रियाँ अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से दिन भर व्रत रखती हैं। कई परिवारों में व्रत सूर्योदय से शुरू होकर शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद खुलता है। कुछ जगहों पर सुबह की सरगी की परंपरा भी है।

इस पर्व का रूप अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में थोड़ा बदल जाता है। कहीं कथा सुनी जाती है, कहीं सामूहिक पूजा होती है, और कहीं परिवार की महिलाएँ साथ बैठकर शृंगार करती हैं। आजकल कई पति और अविवाहित स्त्रियाँ भी अपनी इच्छा से यह व्रत रखते हैं। निर्जल रहना हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं है। यह हर व्यक्ति का अपना निर्णय है।

करवा चौथ की तारीख कैसे तय होती है

करवा चौथ अश्विन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को आता है। पर्व की तारीख चंद्रमा की तिथि से तय होती है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में यह हर साल अलग दिन पड़ता है।

इसका समय-नियम चंद्रोदय पर आधारित है। यानी देखा जाता है कि चतुर्थी तिथि शाम को चंद्रमा निकलने के समय किस दिन उपलब्ध है। व्रत उसी दिन रखा जाता है, क्योंकि पूजा और व्रत खोलना दोनों चंद्रमा के दर्शन से जुड़े हैं। इसी वजह से तिथि एक होने पर भी शहर बदलने से पूजा का समय बदल जाता है।

2026 में करवा चौथ कब है

इस वर्ष करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। नीचे दिए सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं।

शहरवार पूजा मुहूर्त

हर शहर में सूर्योदय और पूजा मुहूर्त की शुरुआत का समय इस प्रकार है:

  • दिल्ली: सूर्योदय सुबह 6:31, पूजा मुहूर्त शुरू शाम 8:12
  • मुंबई: सूर्योदय सुबह 6:37, पूजा मुहूर्त शुरू शाम 8:56
  • कोलकाता: सूर्योदय सुबह 5:39, पूजा मुहूर्त शुरू शाम 7:42
  • चेन्नई: सूर्योदय सुबह 6:02, पूजा मुहूर्त शुरू शाम 8:40
  • बेंगलुरु: सूर्योदय सुबह 6:12, पूजा मुहूर्त शुरू शाम 8:51
  • गुवाहाटी: सूर्योदय सुबह 5:30, पूजा मुहूर्त शुरू शाम 7:19

पूर्व में स्थित शहरों, जैसे गुवाहाटी और कोलकाता, में चंद्रमा पहले निकलता है। पश्चिम और दक्षिण के शहरों, जैसे मुंबई और बेंगलुरु, में उसके लिए कुछ देर इंतज़ार करना पड़ता है। इसलिए एक ही शहर के समय को दूसरे शहर में इस्तेमाल करना ठीक नहीं रहता।

व्रत के दिन की एक सरल रूपरेखा

हर परिवार की परंपरा अलग होती है, फिर भी आम तौर पर दिन कुछ इस तरह चलता है:

  • सुबह सूर्योदय से पहले सरगी या हल्का भोजन, जहाँ यह परंपरा है।
  • दिन में व्रत और घर के काम। कई महिलाएँ इस समय कथा या भजन में मन लगाती हैं।
  • शाम को पूजा की तैयारी और करवा कथा।
  • चंद्रमा दिखने के बाद अर्घ्य देकर, जीवनसाथी के हाथ से जल या कुछ मीठा लेकर व्रत खोलना।

व्रत अपनी श्रद्धा और सुविधा से रखा जाता है। अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई परेशानी है, गर्भावस्था है या आप कोई दवा ले रही हैं, तो निर्जल व्रत से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

अपने शहर का सही समय देखें

ऊपर दी गई सूची में केवल छह बड़े शहर हैं। आपका शहर इनसे दूर हो तो चंद्रोदय और पूजा का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। अपने शहर के अनुसार समय देखने के लिए करवा चौथ का हिंदी पेज खोलें। अंग्रेज़ी में पढ़ना चाहें तो Karva Chauth page भी उपलब्ध है।

उस दिन की तिथि, नक्षत्र और बाकी जानकारी के लिए आज का पंचांग देखा जा सकता है। इस साल के अन्य पर्वों की सूची त्योहार पेज पर मिल जाएगी।

अंत में

करवा चौथ का मूल भाव रिश्ते के प्रति स्नेह, भरोसा और साथ निभाने की भावना है। व्रत कैसे रखा जाए, यह आपकी परिवार-परंपरा और आपकी सुविधा पर निर्भर करता है। तारीख 29 अक्टूबर है और पूजा का समय अपने शहर के हिसाब से जाँच लें।

यह कैसे लिखा जाता है: तारीख़ें, समय और ग्रह स्थितियाँ उन्हीं गणनाओं से आती हैं जिनसे हमारे टूल चलते हैं। लेख AI की मदद से सिर्फ़ इन्हीं तथ्यों से लिखा जाता है, फिर छपने से पहले अपने-आप जाँचा जाता है — हर तारीख़ और समय गणना से मिलाया जाता है, और पूरा लेख एक दूसरा, स्वतंत्र AI संपादक सटीकता और भाषा के लिए पढ़ता है। यह प्रवृत्तियाँ बताता है, निश्चित भविष्य नहीं — और यहाँ कुछ बेचा नहीं जाता। कोई ग़लती दिखे तो hello@bhagyabidata.com पर बताएँ।

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