मुफ़्त दैनिक पंचांग
आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, योग और करण उनके बदलने के सही समय के साथ, सूर्योदय, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और चौघड़िया — सब कुछ सूर्य और चंद्रमा की असली स्थिति से, हर शहर के अपने सूर्योदय के हिसाब से निकाला गया है। नीचे दिल्ली का पंचांग है; अपने शहर का स्थानीय समय देखने के लिए शहर चुनें।
आपका शहर, क़स्बा या गाँव
सूची में नहीं है? कोई भी जगह खोजें — पंचांग उसी जगह के सूर्योदय से बनता है।
दिल्ली
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · आज
आश्विन (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत) · शुक्ल पक्ष · विक्रम संवत 2083 · शक संवत 1948
आज का राहुकाल: सुबह 7:50 – सुबह 9:15
पंचांग के पाँच अंग
| वार | सोमवार · स्वामी ग्रह चंद्रमा |
|---|---|
| तिथि |
|
| नक्षत्र |
|
| योग |
|
| करण |
|
| चंद्र राशि | मकर |
| सूर्य राशि | तुला (निरयन) |
शुभ मुहूर्त
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:44 – सुबह 5:34 |
|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | सुबह 11:43 – दोपहर 12:29 |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 2:00 – दोपहर 2:45 |
| निशीथ मुहूर्त | रात 11:41 – 20 अक्टूबर, रात 12:32 |
आमतौर पर टाले जाने वाले समय
| राहुकाल | सुबह 7:50 – सुबह 9:15 |
|---|---|
| यमगंड | सुबह 10:41 – दोपहर 12:06 |
| गुलिक काल | दोपहर 1:31 – दोपहर 2:57 |
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
| अमृत | सुबह 6:24 – सुबह 7:50 |
|---|---|
| काल | सुबह 7:50 – सुबह 9:15 |
| शुभ | सुबह 9:15 – सुबह 10:41 |
| रोग | सुबह 10:41 – दोपहर 12:06 |
| उद्वेग | दोपहर 12:06 – दोपहर 1:31 |
| चर | दोपहर 1:31 – दोपहर 2:57 |
| लाभ | दोपहर 2:57 – शाम 4:22 |
| अमृत | शाम 4:22 – शाम 5:48 |
रात का चौघड़िया
| चर | शाम 5:48 – शाम 7:22 |
|---|---|
| रोग | शाम 7:22 – रात 8:57 |
| काल | रात 8:57 – रात 10:32 |
| लाभ | रात 10:32 – 20 अक्टूबर, रात 12:06 |
| उद्वेग | 20 अक्टूबर, रात 12:06 – रात 1:41 |
| शुभ | 20 अक्टूबर, रात 1:41 – रात 3:16 |
| अमृत | 20 अक्टूबर, रात 3:16 – सुबह 4:50 |
| चर | 20 अक्टूबर, सुबह 4:50 – सुबह 6:25 |
अमृत, शुभ और लाभ परंपरा से अच्छे माने जाते हैं; चर सामान्य है और यात्रा के लिए लिया जाता है; उद्वेग, काल और रोग में नए काम की शुरुआत परंपरा से टाली जाती है।
यह पंचांग कैसे पढ़ें
पंचांग का अर्थ है ‘पाँच अंग’ — वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। इस पेज का हर मान सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक स्थिति से गणना करके निकाला गया है, किसी छपी तालिका से नहीं, इसलिए आप किसी भी मान को अपने पंचांग से मिलाकर देख सकते हैं।
दिन सूर्योदय से शुरू होता है
पंचांग का दिन आधी रात से नहीं, एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। हर अंग का नाम सूर्योदय के समय की स्थिति से लिया जाता है, और अगले सूर्योदय से पहले होने वाला हर बदलाव उसके समय के साथ दिखाया जाता है। इसीलिए आधी रात के बाद का कोई समय अगली तारीख़ के साथ लिखा होता है — वह फिर भी इसी पंचांग दिवस का हिस्सा है।
पाँच अंग
- तिथि — चंद्र दिवस: चंद्रमा सूर्य से हर 12° आगे बढ़ने पर एक तिथि पूरी करता है। एक चंद्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं — पंद्रह शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा तक) और पंद्रह कृष्ण पक्ष में (अमावस्या तक)।
- नक्षत्र — चंद्रमा जिस नक्षत्र में है। सत्ताईस नक्षत्र हैं, हर एक 13°20′ का।
- योग — सूर्य और चंद्रमा के निरयन भोगांश का योग, सत्ताईस भागों में।
- करण — आधी तिथि। विष्टि करण को भद्रा भी कहते हैं, और शुभ कामों की शुरुआत में इसे टाला जाता है।
- वार — सप्ताह का दिन, जो सूर्योदय से गिना जाता है, आधी रात से नहीं।
मुहूर्त और टाले जाने वाले समय
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल दिन के उजाले को आठ बराबर भागों में बाँटकर वार के अनुसार चुने जाते हैं। अभिजित मुहूर्त दोपहर के आसपास का शुभ समय है, और ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का, जो ध्यान और पढ़ाई के लिए अच्छा माना जाता है। चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है। ये सब समय चुनने के पारंपरिक नियम हैं — किसी दिन को डरने की वजह नहीं।
गणना: निरयन राशिचक्र, लाहिड़ी अयनांश। सूर्योदय और सूर्यास्त सूर्य के ऊपरी किनारे और वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ, जैसा पंचांगों में चलता है। चंद्रोदय और चंद्रास्त छपे पंचांगों से कुछ मिनट अलग हो सकते हैं।
त्योहार कब है? दिवाली, होली, नवरात्रि समेत 20 त्योहारों की तिथि और मुहूर्त देखें।
आम सवाल
पंचांग क्या है?
पंचांग किसी एक दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं — वार, तिथि (चंद्र दिवस), चंद्रमा का नक्षत्र, योग और करण। परिवार इसी से संस्कारों और शुभ कामों की तारीख़ चुनते हैं, यह देखते हैं कि कोई व्रत या त्योहार किस तिथि को है, और नई शुरुआत के लिए राहुकाल जैसे समय टालते हैं।
पंचांग शहर के हिसाब से अलग क्यों होता है?
पंचांग का दिन सूर्योदय से शुरू होता है, और सूर्योदय हर जगह अलग समय पर होता है। तिथि पूरी दुनिया में एक ही पल में बदलती है, पर सूर्योदय के समय कौन-सी तिथि चल रही है — जिससे उस दिन का नाम तय होता है — वह शहरों में अलग हो सकती है। सारे समय भी स्थानीय घड़ी के हिसाब से होते हैं। इसीलिए यहाँ हर शहर का अपना पेज है।
आज राहुकाल कब है?
ऊपर दिल्ली का राहुकाल आज के असली सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला गया है। राहुकाल दिन के उजाले का आठवाँ हिस्सा होता है, इसलिए इसका समय पूरे साल हर दिन थोड़ा बदलता रहता है। अपने शहर का समय देखने के लिए ऊपर की सूची से शहर चुनें।
मेरा शहर सूची में नहीं है। मैं क्या देखूँ?
शहरों की सूची के ऊपर वाले बॉक्स में उसे खोजें — कोई भी शहर, क़स्बा या गाँव चलेगा, और पंचांग उसी जगह के सूर्योदय और स्थानीय समय से बनता है। पेज आपकी जगह इसी डिवाइस पर याद रखता है। किसी ख़ास पल का सटीक पंचांग — जैसे आपके जन्म का — देखने के लिए मुफ़्त जन्म कुंडली बनाएँ।
अमांत और पूर्णिमांत महीने में क्या फ़र्क़ है?
अमांत महीना अमावस्या पर ख़त्म होता है और पूर्णिमांत महीना पूर्णिमा पर। शुक्ल पक्ष में दोनों का नाम एक ही होता है; कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत महीना अगले महीने का नाम ले लेता है। उत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्सों में पूर्णिमांत चलता है, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में अमांत। यहाँ दोनों दिखाए गए हैं।