मुफ़्त टूल
कुंडली मिलान
शास्त्रीय गुण मिलान दो कुंडलियों को आठ कूटों से परखता है — कुल 36 गुण — जो दोनों के चंद्रमा से पढ़े जाते हैं। वर और कन्या, दोनों का जन्म विवरण भरें: यह टूल सटीक निरयन स्थितियों से पूरा अष्टकूट मिलान निकालता है, हर कूट का मतलब समझाता है, दोनों का मंगल दोष देखता है और पारंपरिक सावधानियों को सही संदर्भ में रखता है।
शास्त्रीय तालिकाएँ आठ में से दो कूट (वर्ण और गण) वर की ओर से गिनती हैं, इसलिए पहले वर का विवरण भरें, फिर कन्या का। जन्म का समय न पता हो तो भी मिलान होगा — और हम साफ़ बताएँगे कि समय न होने से अंक कितने बदल सकते हैं।
वर का जन्म विवरण
कन्या का जन्म विवरण
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गुण मिलान क्या बताता है — और क्या नहीं
अष्टकूट भारत में मिलान का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीक़ा है, और सबसे ज़्यादा ग़लत समझा जाने वाला भी। यह एक असली शास्त्रीय विधि है जिसका अपना तर्क है, पर इसके इर्द-गिर्द जितना भरोसा दिखाया जाता है, यह उससे कहीं सीमित औज़ार है।
आठ कूट, संक्षेप में
- वर्ण (1 अंक) — स्वभाव और सोच का मोटा मेल; यहाँ इसका अर्थ जाति नहीं, स्वाभाविक प्रवृत्ति है।
- वश्य (2) — दोनों में से किसका स्वाभाविक प्रभाव दूसरे पर रहता है।
- तारा (3) — दोनों जन्म नक्षत्रों का संबंध, दोनों दिशाओं से गिनकर।
- योनि (4) — सहज और शारीरिक अनुकूलता, नक्षत्रों के पशु-प्रतीकों से।
- ग्रह मैत्री (5) — दोनों चंद्र राशियों के स्वामी ग्रहों की मित्रता, यानी मानसिक और भावनात्मक मेल।
- गण (6) — स्वभाव का प्रकार: देव, मनुष्य और राक्षस।
- भकूट (7) — दोनों चंद्र राशियों के बीच की दूरी, जिसे घर की समृद्धि से जोड़ा जाता है।
- नाड़ी (8) — शारीरिक प्रकृति; सबसे ज़्यादा भार और सबसे ज़्यादा चिंता इसी की।
इस टूल में क्या अलग है
चंद्रमा की स्थिति एक पेशेवर स्तर के खगोलीय गणित से, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है, और आपका जन्म विवरण आपके ब्राउज़र से बाहर नहीं जाता। हम कोई ‘उपाय’ नहीं बेचते — कम अंक आने पर भी नहीं। अगर आप किसी रिश्ते पर गंभीरता से सोच रहे हैं, तो दोनों की पूरी जन्म कुंडली देखें, या अपनी कुंडली के बारे में सवाल पूछें।
आम सवाल
कितने गुण मिलने पर विवाह अच्छा माना जाता है?
परंपरा में 36 में से 18 गुण की सीमा मानी जाती है। 18 से कम पारंपरिक सीमा से नीचे है; यह साइट 18 से 23 को अच्छा, 24 से 29 को बहुत अच्छा और 30 या उससे अधिक को उत्तम मिलान कहती है (पंचांग इन श्रेणियों को थोड़ा अलग शब्दों में कहते हैं)। ध्यान रहे कि ये सीमाएँ परंपरा हैं, किसी प्रमाण से निकली नहीं, और 17 और 18 के बीच का फ़र्क़ आठ में से किसी एक कूट का सिर्फ़ एक अंक है। इसे मोटा संकेत मानें, कोई खाई नहीं।
अष्टकूट के आठ कूट कौन-से हैं?
वर्ण (1 अंक) स्वभाव का मेल देखता है। वश्य (2) आपसी प्रभाव। तारा (3) दोनों जन्म नक्षत्रों की शुभता। योनि (4) सहज स्वभाव और शारीरिक अनुकूलता, नक्षत्रों के पशु-प्रतीकों से। ग्रह मैत्री (5) दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों की मित्रता। गण (6) स्वभाव का प्रकार — देव, मनुष्य या राक्षस। भकूट (7) दोनों चंद्र राशियों के बीच की दूरी। नाड़ी (8) शारीरिक प्रकृति। कुल मिलाकर 36 गुण।
अलग-अलग वेबसाइटें अलग गुण क्यों बताती हैं?
क्योंकि कुछ बीच के मानों पर, ख़ासकर वश्य और तारा में, परंपराएँ ख़ुद एकमत नहीं हैं, और भकूट व नाड़ी दोष के परिहार भी क्षेत्र के हिसाब से अलग माने जाते हैं। हम आम उत्तर भारतीय परंपरा अपनाते हैं और यह साफ़ बताते हैं। एक-दो अंक का फ़र्क़ सामान्य है; बड़ा फ़र्क़ आमतौर पर इसलिए होता है कि अलग अयनांश से किसी का चंद्रमा दूसरे नक्षत्र में चला गया।
नाड़ी दोष क्या है और क्या यह सचमुच मायने रखता है?
नाड़ी को सबसे ज़्यादा भार मिलता है — 36 में से 8 अंक — और दोनों की नाड़ी एक होने पर इसमें शून्य मिलता है। परंपरा में इसे संतान से जुड़ी चिंता से जोड़ा जाता है, और रिश्ते ठुकराए जाने की यह सबसे आम वजह है, जो इसके प्रमाण के अनुपात में कहीं ज़्यादा है। शास्त्र ख़ुद इसके परिहार बताते हैं — जैसे राशि एक हो पर नक्षत्र अलग, या नक्षत्र एक हो पर चरण अलग। यहाँ शून्य कोई अंतिम फ़ैसला नहीं है।
क्या गुण मिलान पूरी कुंडली देखता है?
नहीं, और यही इसकी सबसे बड़ी सीमा है। आठों कूट सिर्फ़ दोनों के चंद्रमा की स्थिति से निकलते हैं। यह लग्न, विवाह का असली भाव यानी सातवाँ भाव, शुक्र, मंगल, दोनों की चल रही दशा या कुंडली का कुछ और नहीं देखता। गंभीर मिलान करने वाला ज्योतिषी गुण मिलान को पहली छलनी मानता है और फिर दोनों कुंडलियाँ ठीक से पढ़ता है।
क्या दोनों का जन्म समय सही होना ज़रूरी है?
जितना आप सोचते हैं, उतना नहीं। पूरा हिसाब चंद्रमा पर टिका है, और चंद्रमा को राशि बदलने में दो दिन से ज़्यादा और नक्षत्र बदलने में लगभग एक दिन लगता है, इसलिए ज़्यादातर मामलों में दिन का कोई भी समय लें, नतीजा वही रहता है। समय तभी मायने रखता है जब किसी का जन्म नक्षत्र की सीमा के पास हुआ हो। समय न पता हो तो ‘मुझे जन्म का समय नहीं पता’ चुनें — टूल दोपहर 12 बजे मान लेगा। हाँ, मंगल दोष का लग्न वाला हिस्सा सही समय पर निर्भर है।
क्या नाम से कुंडली मिलान हो सकता है?
नाम के पहले अक्षर से नक्षत्र का अनुमान लगाकर मिलान करने की एक परंपरा है, पर वह अनुमान ही है — नाम अक्सर जन्म नक्षत्र से नहीं रखा जाता। जहाँ जन्म तिथि, समय और स्थान पता हों, वहाँ उनसे निकला असली चंद्र नक्षत्र कहीं ज़्यादा भरोसेमंद है। यह टूल जन्म विवरण से ही मिलान करता है।