दैनिक पंचांग · पश्चिम बंगाल
कोलकाता का आज का पंचांग
तिथि, नक्षत्र, योग और करण उनके बदलने के सही समय के साथ, सूर्योदय और सूर्यास्त, राहुकाल, दिन के शुभ मुहूर्त और चौघड़िया — सब कोलकाता के अपने सूर्योदय से (22.57° उ., 88.36° पू.), स्थानीय समय में। किसी और दिन का पंचांग देखने के लिए तीर या तारीख़ का बॉक्स इस्तेमाल करें।
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · आज
आश्विन (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत) · शुक्ल पक्ष · विक्रम संवत 2083 · शक संवत 1948
आज का राहुकाल: सुबह 7:01 – सुबह 8:28
पंचांग के पाँच अंग
| वार | सोमवार · स्वामी ग्रह चंद्रमा |
|---|---|
| तिथि |
|
| नक्षत्र |
|
| योग |
|
| करण |
|
| चंद्र राशि | मकर |
| सूर्य राशि | तुला (निरयन) |
शुभ मुहूर्त
| ब्रह्म मुहूर्त | रात 3:55 – सुबह 4:45 |
|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | सुबह 10:58 – सुबह 11:45 |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 1:17 – दोपहर 2:03 |
| निशीथ मुहूर्त | रात 10:57 – रात 11:47 |
आमतौर पर टाले जाने वाले समय
| राहुकाल | सुबह 7:01 – सुबह 8:28 |
|---|---|
| यमगंड | सुबह 9:55 – सुबह 11:21 |
| गुलिक काल | दोपहर 12:48 – दोपहर 2:15 |
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
| अमृत | सुबह 5:35 – सुबह 7:01 |
|---|---|
| काल | सुबह 7:01 – सुबह 8:28 |
| शुभ | सुबह 8:28 – सुबह 9:55 |
| रोग | सुबह 9:55 – सुबह 11:21 |
| उद्वेग | सुबह 11:21 – दोपहर 12:48 |
| चर | दोपहर 12:48 – दोपहर 2:15 |
| लाभ | दोपहर 2:15 – दोपहर 3:42 |
| अमृत | दोपहर 3:42 – शाम 5:08 |
रात का चौघड़िया
| चर | शाम 5:08 – शाम 6:42 |
|---|---|
| रोग | शाम 6:42 – रात 8:15 |
| काल | रात 8:15 – रात 9:48 |
| लाभ | रात 9:48 – रात 11:22 |
| उद्वेग | रात 11:22 – 20 अक्टूबर, रात 12:55 |
| शुभ | 20 अक्टूबर, रात 12:55 – रात 2:28 |
| अमृत | 20 अक्टूबर, रात 2:28 – सुबह 4:02 |
| चर | 20 अक्टूबर, सुबह 4:02 – सुबह 5:35 |
अमृत, शुभ और लाभ परंपरा से अच्छे माने जाते हैं; चर सामान्य है और यात्रा के लिए लिया जाता है; उद्वेग, काल और रोग में नए काम की शुरुआत परंपरा से टाली जाती है।
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यह पंचांग कैसे पढ़ें
पंचांग का अर्थ है ‘पाँच अंग’ — वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। इस पेज का हर मान कोलकाता के लिए सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक स्थिति से गणना करके निकाला गया है, किसी छपी तालिका से नहीं, इसलिए आप किसी भी मान को अपने पंचांग से मिलाकर देख सकते हैं।
दिन सूर्योदय से शुरू होता है
पंचांग का दिन आधी रात से नहीं, एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। हर अंग का नाम सूर्योदय के समय की स्थिति से लिया जाता है, और अगले सूर्योदय से पहले होने वाला हर बदलाव उसके समय के साथ दिखाया जाता है। इसीलिए आधी रात के बाद का कोई समय अगली तारीख़ के साथ लिखा होता है — वह फिर भी इसी पंचांग दिवस का हिस्सा है।
पाँच अंग
- तिथि — चंद्र दिवस: चंद्रमा सूर्य से हर 12° आगे बढ़ने पर एक तिथि पूरी करता है। एक चंद्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं — पंद्रह शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा तक) और पंद्रह कृष्ण पक्ष में (अमावस्या तक)।
- नक्षत्र — चंद्रमा जिस नक्षत्र में है। सत्ताईस नक्षत्र हैं, हर एक 13°20′ का।
- योग — सूर्य और चंद्रमा के निरयन भोगांश का योग, सत्ताईस भागों में।
- करण — आधी तिथि। विष्टि करण को भद्रा भी कहते हैं, और शुभ कामों की शुरुआत में इसे टाला जाता है।
- वार — सप्ताह का दिन, जो सूर्योदय से गिना जाता है, आधी रात से नहीं।
मुहूर्त और टाले जाने वाले समय
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल दिन के उजाले को आठ बराबर भागों में बाँटकर वार के अनुसार चुने जाते हैं। अभिजित मुहूर्त दोपहर के आसपास का शुभ समय है, और ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का, जो ध्यान और पढ़ाई के लिए अच्छा माना जाता है। चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है। ये सब समय चुनने के पारंपरिक नियम हैं — किसी दिन को डरने की वजह नहीं।
गणना: निरयन राशिचक्र, लाहिड़ी अयनांश। सूर्योदय और सूर्यास्त सूर्य के ऊपरी किनारे और वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ, जैसा पंचांगों में चलता है। चंद्रोदय और चंद्रास्त छपे पंचांगों से कुछ मिनट अलग हो सकते हैं।
त्योहारों की तिथि और मुहूर्त — दिवाली, होली, नवरात्रि और अन्य।
आम सवाल
कोलकाता का पंचांग किसी दूसरे शहर के छपे पंचांग से अलग क्यों है?
क्योंकि पंचांग का दिन सूर्योदय से शुरू होता है, और सूर्योदय इस पर निर्भर है कि आप कहाँ हैं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही पल में बदलते हैं, पर कोलकाता के सूर्योदय के समय कौन-सा चल रहा है — और हर बदलाव का स्थानीय समय क्या है — यह कोलकाता की भौगोलिक स्थिति से तय होता है। राहुकाल और मुहूर्त कोलकाता के अपने दिन की लंबाई के हिस्से हैं, इसलिए वे भी उसी के साथ बदलते हैं।
आज कोलकाता में राहुकाल कब है?
ऊपर कोलकाता का राहुकाल आज के असली सूर्योदय और सूर्यास्त से दिया गया है। राहुकाल दिन के उजाले का आठवाँ हिस्सा है, इसलिए इसका घड़ी वाला समय साल भर हर दिन थोड़ा बदलता है।
यह अमांत है या पूर्णिमांत?
दोनों दिखाए गए हैं। शुक्ल पक्ष में दोनों प्रणालियों में महीने का नाम एक ही होता है और कृष्ण पक्ष में अलग। अमांत (अमावस्या पर ख़त्म होने वाला महीना) गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में चलता है; पूर्णिमांत (पूर्णिमा पर ख़त्म होने वाला) उत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्सों में।
ये समय कितने सटीक हैं?
तिथि, नक्षत्र, योग और करण एक मिनट से भी कम की सटीकता से निकाले गए हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त पंचांगों की परंपरा के अनुसार हैं और छपे पंचांगों से एक मिनट के भीतर मिलते हैं। चंद्रोदय और चंद्रास्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, क्योंकि चंद्रमा के लिए नियम अलग-अलग हैं।