हिंदू त्योहार · नई दिल्ली के लिए गणना

होली 2027 कब है — होलिका दहन मुहूर्त

2027 में नई दिल्ली में होलिका दहन रविवार, 21 मार्च 2027 को है और रंगों वाली होली सोमवार, 22 मार्च 2027 को। पूर्णिमा की रात होलिका दहन, अगली सुबह रंगों की होली।

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होलिका दहनरविवार, 21 मार्च
होलिका दहन मुहूर्तभद्रा पूरी रात (सुबह 5:15, 22 मार्च तक); दहन का समय स्थानीय रूप से तय होता है
पूर्णिमा आरंभशाम 6:22, 21 मार्च
पूर्णिमा समाप्तशाम 4:14, 22 मार्च

होलिका दहन मुहूर्त: प्रदोष: सूर्यास्त के बाद रात का पहला पाँचवाँ भाग, तिथि रहते।

भद्रा: शाम 6:22, 21 मार्च से सुबह 5:15, 22 मार्च तक।

तारीख़ कैसे तय होती है

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में, भद्रा (पूर्णिमा का पहला आधा भाग) से बचकर होता है। अगर शाम को भद्रा हो पर आधी रात से पहले ख़त्म हो जाए, तो दहन भद्रा ख़त्म होने पर होता है। अगर भद्रा आधी रात के बाद तक रहे और अगले दिन पूर्णिमा कम से कम साढ़े तीन प्रहर रहे, तो दहन अगली शाम होता है (धर्मसिंधु का नियम)। रंगों वाली होली (धुलंडी) उसकी अगली सुबह।

इस वर्ष भद्रा पूरी रात रहती है, और अगले दिन पूर्णिमा इतनी जल्दी ख़त्म होती है कि दहन आगे नहीं जा सकता। ऐसे में पंचांग या तो भद्रा के अंतिम भाग (भद्रा पुच्छ) में या भोर के पास भद्रा ख़त्म होने के बाद दहन बताते हैं; अपने स्थानीय मंदिर या पुरोहित का बताया समय मानें। कुछ पंचांग होलिका दहन अगली शाम कर देते हैं।

आने वाले वर्षों की तारीख़ें (नई दिल्ली)

वर्षतारीख़होलिका दहन मुहूर्त
2026मंगलवार, 3 मार्च · बीत चुका
होली (रंग): बुधवार, 4 मार्च
पूर्णिमा: शाम 5:56, 2 मार्च → शाम 5:08, 3 मार्च
शाम 6:22 – रात 8:50
2027रविवार, 21 मार्च
होली (रंग): सोमवार, 22 मार्च
पूर्णिमा: शाम 6:22, 21 मार्च → शाम 4:14, 22 मार्च
भद्रा पूरी रात (सुबह 5:15, 22 मार्च तक); दहन का समय स्थानीय रूप से तय होता है
2028शुक्रवार, 10 मार्च
होली (रंग): शनिवार, 11 मार्च
पूर्णिमा: सुबह 10:21, 10 मार्च → सुबह 6:36, 11 मार्च
रात 8:29 – रात 8:52
2029बुधवार, 28 फ़रवरी
होली (रंग): गुरुवार, 1 मार्च
पूर्णिमा: रात 2:05, 28 फ़रवरी → रात 10:40, 28 फ़रवरी
शाम 6:20 – रात 8:50

नई दिल्ली का उस दिन का पूरा पंचांग देखें →

आपके शहर में

तिथि हर जगह एक ही क्षण बदलती है, पर सूर्योदय, सूर्यास्त, आधी रात और चंद्रोदय स्थानीय होते हैं — इसलिए त्योहार का दिन शहर-शहर में अलग हो सकता है, ख़ासकर विदेश में।

होलिका दहनरविवार, 21 मार्च 2027
होलिका दहन मुहूर्तभद्रा पूरी रात (सुबह 5:15, 22 मार्च तक); दहन का समय स्थानीय रूप से तय होता है
होली (रंग)सोमवार, 22 मार्च 2027

दिल्ली का पूरा पंचांग →

2027 में जिन शहरों की तारीख़ अलग है

त्योहार के बारे में

होली असल में एक के बाद एक दो त्योहार हैं। फाल्गुन पूर्णिमा की शाम होलिका दहन होता है — प्रह्लाद की कथा की याद में जलाई जाने वाली आग। विष्णु भक्त बालक प्रह्लाद आग में सुरक्षित बैठे रहे, जबकि उनकी बुआ होलिका, जिसे आग से बचाने का वरदान था, जल गई। परिवार अग्नि की परिक्रमा करते हैं, नई फ़सल की बालियाँ, नारियल और उपले चढ़ाते हैं, और उसकी थोड़ी-सी आँच घर ले जाते हैं।

अगली सुबह रंगवाली होली होती है, जिसे धुलंडी या धुलेटी भी कहते हैं — रंग, पानी और गुलाल का दिन, दोस्तों से मिलने और पुराने मनमुटाव भुलाने का दिन। ब्रज में, मथुरा-वृंदावन के आसपास, यह उत्सव कई दिन चलता है और बरसाना की लठमार होली इसी का हिस्सा है। बंगाल और ओडिशा में यही पूर्णिमा दोल पूर्णिमा है, जब कृष्ण की प्रतिमा को झूले पर झुलाया जाता है।

दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में, पूर्णिमा रहते किया जाता है, पर भद्रा (पूर्णिमा का पहला आधा भाग) में नहीं। जब भद्रा शाम को घेरे हो, तो पंचांग दहन का समय भद्रा ख़त्म होने के बाद रखते हैं, या कुछ वर्षों में अगली शाम कर देते हैं — इसीलिए अलग-अलग पंचांगों में होली की तारीख़ कभी-कभी अलग दिखती है।

आम सवाल

होली 2027 कब है?

नई दिल्ली में 2027 में होलिका दहन रविवार, 21 मार्च 2027 को है और रंगों वाली होली सोमवार, 22 मार्च 2027 को। पूर्णिमा: शाम 6:22, 21 मार्च → शाम 4:14, 22 मार्च।

होली 2027 में होलिका दहन मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली के लिए: भद्रा पूरी रात (सुबह 5:15, 22 मार्च तक); दहन का समय स्थानीय रूप से तय होता है। यह समय शहर के अपने सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला गया है, इसलिए दूसरे शहरों में यह कुछ मिनट या उससे ज़्यादा अलग होगा।

क्या होली की तारीख़ हर शहर में एक ही है?

2027 में ज़्यादातर शहरों में नहीं बदलती, पर गुवाहाटी, सिंगापुर, सिडनी में तारीख़ अलग है, क्योंकि वहाँ का सूर्योदय, सूर्यास्त या चंद्रोदय तिथि के बदलने के समय के दूसरी ओर पड़ता है।

भद्रा क्या है, और इससे होलिका दहन का समय क्यों बदलता है?

भद्रा विष्टि करण है — यहाँ पूर्णिमा तिथि का पहला आधा भाग। शास्त्र होलिका दहन के लिए इसे टालते हैं, इसलिए जब भद्रा शाम को घेरे हो तो दहन भद्रा ख़त्म होने तक रुकता है। अगर भद्रा पूरी रात रहे, तो धर्मसिंधु अगली शाम की अनुमति देता है, बशर्ते अगले दिन पूर्णिमा साढ़े तीन प्रहर तक रहे।